देशभर में गणेशोत्सव की भव्य शुरुआत, जानिए चतुर्थी तिथि, मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि
Ganesh Chaturthi 2026: आज से यानी 14 सितंबर से गणेशोत्सव का पर्व आरंभ हो चुका है। आज घर-घर भगवान गणपति विराजेंगे और विधि-विधान के साथ पूजा होगी।

Ganesh Chaturthi 2026: देशभर में आज से गणपति उत्सव की भव्य शुरुआत हो रही है। घर-घर और पंडालों में विघ्नहर्ता भगवान गणेश विराजमान होंगे। गणपति बप्पा के स्वागत के लिए भक्तों में खासा उत्साह है और बाजारों से लेकर पूजा पंडालों तक रौनक नजर आ रही है। देशभर में गणेशोत्सव को लेकर खास तैयारियां की गई हैं। अगले दस दिनों तक पूजा-अर्चना, भक्ति और उत्सव का माहौल रहेगा।
कब रहेगा स्थापना का शुभ मुहूर्त ?
विघ्नहर्ता भगवान गणेश की भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि को गणेश स्थापना की जाती है। भगवान गणेश की पूजा का सबसे अच्छा समय दिन के मध्याह्र काल का होता है। ऐसे में मध्याह्र काल का सबसे अच्छा मुहूर्त आज 14 सितंबर को सुबह 11 बजकर 21 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस समय भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा को विधि-विधान के साथ घरों में स्थापित कर सकते हैं। इसके अलावा दूसरे शुभ मुहूर्त में गणपति स्थापना कर सकते हैं।
दिनभर में गणपति स्थापना के 5 मुहूर्त
अमृत - सुबह 06 बजकर 17 मिनट से लेकर 07 बजकर 47 मिनट तक।
शुभ- सुबह 09 बजकर 17 मिनट से लेकर 10 बजकर 47 मिनट तक।
लाभ- दोपहर 03 बजकर 17 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 47 मिनट तक।
अमृत- शाम 04 बजकर 47 मिनट लेकर 06 बजकर 17 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 30 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक।
गणेश चतुर्थी पूजा विधि
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। गणपति को जल, पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं. इसके बाद चंदन, रोली, अक्षत, सिंदूर और फूल अर्पित करें। भगवान गणेश को दूर्वा और लाल फूल विशेष रूप से अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर गणेश जी की आरती करें। पूजा के दौरान गणपति मंत्र का जाप करने के बाद अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखें। परिवार के सभी सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण करें। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ गणपति बप्पा का स्मरण करना ही पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान गणेश का जन्म माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र के रूप में हुआ था। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और बुद्धि-विवेक के देवता माना जाता है इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि यह भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। भक्त गणपति बप्पा से बुद्धि, विवेक, सफलता और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ पर्व का समापन होता है और भक्त अगले वर्ष भगवान गणेश के पुनः आगमन की कामना करते हैं।




