Bhopal Water Crisis : मानसून की बेरुखी से बड़े तालाब का जलस्तर चिंताजनक, शहर की जल आपूर्ति पर बढ़ा खतरा
Bhopal Water Crisis : यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो सर्दी और गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
Bhopal Water Crisis : भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस वर्ष कम बारिश के कारण जल संकट की आशंका गहराने लगी है। शहर की पेयजल व्यवस्था का प्रमुख स्रोत माने जाने वाला बड़ा तालाब इस बार जुलाई के अंत तक भी सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सका है। हर साल इसी समय तक तालाब लगभग भर जाता था, लेकिन इस बार जलस्तर काफी कम बना हुआ है। लगातार कमजोर मानसून ने नगर निगम और शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो सर्दी और गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार जलस्तर काफी कम
बड़े तालाब का पूर्ण जलस्तर 1666.80 फीट माना जाता है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में जुलाई के अंतिम सप्ताह तक जलस्तर 1664.50 फीट तक पहुंच गया था।
वर्ष 2024 में अच्छी बारिश के कारण जलस्तर 1665.80 फीट दर्ज किया गया था और भदभदा डैम के गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा गया था। वर्ष 2025 में भी जुलाई के अंत तक जलस्तर सुरक्षित स्तर पर बना रहा।
वहीं वर्ष 2026 में जुलाई के अंतिम दिनों तक जलस्तर केवल 1658 से 1659 फीट के बीच दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है और इसे चिंता का विषय माना जा रहा है।
औसत से कम बारिश ने बढ़ाई परेशानी
इस वर्ष भोपाल में जुलाई तक सामान्य रूप से 20 से 22 इंच बारिश होने की उम्मीद रहती है, लेकिन अब तक केवल 10 से 12 इंच वर्षा ही दर्ज की गई है। यानी सामान्य औसत से लगभग 40 से 45 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
इसका सीधा असर बड़े तालाब के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। बोट क्लब क्षेत्र में तालाब का पानी अब भी किनारों से काफी दूर है और कई हिस्सों में सूखी जमीन साफ दिखाई दे रही है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि जल संग्रहण अपेक्षित स्तर तक नहीं हो पाया है।
मौसम विभाग ने अगस्त और सितंबर के लिए जताई उम्मीद
हालांकि मौसम विभाग ने आने वाले सप्ताहों में राहत मिलने की संभावना जताई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगस्त और सितंबर में सक्रिय होने वाले नए मानसूनी सिस्टम के कारण भोपाल सहित पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश हो सकती है।
यदि कैचमेंट एरिया में पर्याप्त वर्षा होती है तो बड़े तालाब का जलस्तर बढ़ सकता है और जल संकट का खतरा कुछ हद तक कम हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी बारिश के साथ भूजल स्तर का रिचार्ज होना भी बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में पेयजल की समस्या न बढ़े।
भदभदा और कलियासोत डैम के गेट अब तक नहीं खुले
आमतौर पर जुलाई के दौरान बड़े तालाब के भरने पर भदभदा और कलियासोत डैम के गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है। लेकिन इस वर्ष अब तक ऐसी स्थिति नहीं बनी है। डैम के गेट पूरी तरह बंद हैं, जिससे साफ है कि जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा है।
यदि मानसून की रफ्तार आने वाले दिनों में भी कमजोर रही और कैचमेंट क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो भोपाल की पेयजल व्यवस्था के साथ-साथ कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है। किसान भी कम बारिश के कारण खरीफ फसलों और सिंचाई को लेकर चिंता जता रहे हैं।

