कोलेस्ट्रॉल कितना बढ़ने पर पड़ती है दवा की जरूरत? डॉक्टर से जानिए कब सिर्फ लाइफस्टाइल बदलाव से हो सकता है कंट्रोल
क्या हाई कोलेस्ट्रॉल होने पर हर व्यक्ति को दवा लेनी चाहिए? जानिए डॉक्टर के अनुसार किन लोगों के लिए सिर्फ लाइफस्टाइल बदलाव काफी होते हैं और किन मामलों में दवा जरूरी हो जाती है।

कोलेस्ट्रॉल कितना बढ़ने पर पड़ती है दवा की जरूरत? डॉक्टर से जानिए कब सिर्फ लाइफस्टाइल बदलाव से हो सकता है कंट्रोल
नई दिल्ली। शरीर में कोलेस्ट्रॉल एक जरूरी तत्व है, जो कोशिकाओं के निर्माण, हार्मोन बनाने और विटामिन-डी के उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जब इसकी मात्रा सामान्य सीमा से अधिक हो जाती है, तो यही कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और ब्लॉकेज जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या कोलेस्ट्रॉल बढ़ते ही दवा शुरू कर देनी चाहिए, या फिर खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव से भी इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इस विषय पर आर्टेमिस हॉस्पिटल की यूनिट हेड एवं सीनियर कंसल्टेंट (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. सीमा धीर ने विस्तार से जानकारी दी।
क्यों बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल?
हाई कोलेस्ट्रॉल के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं—
- तली-भुनी और अधिक वसायुक्त चीजों का अधिक सेवन
- नियमित शारीरिक गतिविधि की कमी
- धूम्रपान और शराब का सेवन
- लगातार तनाव में रहना
- पर्याप्त नींद न लेना
- बढ़ती उम्र के साथ मेटाबॉलिज्म का धीमा होना
- मोटापा और बढ़ता वजन
इन कारणों से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ सकता है, जो धमनियों में जमा होकर रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है।
क्या हाई कोलेस्ट्रॉल होने पर हर किसी को दवा लेनी चाहिए?
डॉ. सीमा धीर के अनुसार, हर व्यक्ति का इलाज उसकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। केवल कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाना दवा शुरू करने का एकमात्र आधार नहीं होता।
उन्होंने बताया कि डॉक्टर सबसे पहले मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री का मूल्यांकन करते हैं। इसमें उम्र, एलडीएल (LDL) का स्तर, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान की आदत और भविष्य में हार्ट डिजीज के जोखिम जैसे कई पहलुओं को देखा जाता है।
किन लोगों में सिर्फ लाइफस्टाइल बदलाव से हो सकता है फायदा?
यदि किसी व्यक्ति का LDL कोलेस्ट्रॉल केवल हल्का बढ़ा हुआ है और उसे हृदय रोग का खतरा कम है, तो शुरुआती 3 से 6 महीने तक डॉक्टर आमतौर पर दवा की बजाय लाइफस्टाइल में सुधार की सलाह देते हैं।
इस दौरान इन बातों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है—
- संतुलित और कम वसा वाला आहार लें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
- वजन नियंत्रित रखें।
- पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लें।
- धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।
- तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन अपनाएं।
कई मामलों में केवल इन बदलावों से ही कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार देखा जा सकता है।
कब जरूरी हो जाती है दवा?
डॉ. सीमा धीर बताती हैं कि कुछ परिस्थितियों में केवल लाइफस्टाइल बदलाव पर्याप्त नहीं होते और दवा की जरूरत पड़ सकती है।
दवा की सलाह इन स्थितियों में दी जा सकती है—
- LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत अधिक हो।
- मरीज को पहले हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो चुका हो।
- परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास हो।
- मरीज को डायबिटीज या अन्य गंभीर जोखिम कारक हों।
- डॉक्टर द्वारा हार्ट डिजीज का जोखिम अधिक आंका गया हो।
ऐसे मरीजों में डॉक्टर लाइफस्टाइल सुधार के साथ दवाएं भी शुरू कर सकते हैं।
दवा अपने मन से बंद करना हो सकता है खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग रिपोर्ट सामान्य आने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद कर देते हैं। यह आदत नुकसानदायक साबित हो सकती है।
डॉ. सीमा धीर कहती हैं कि दवा बंद करने या उसकी मात्रा में बदलाव हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा छोड़ने से कोलेस्ट्रॉल दोबारा बढ़ सकता है और भविष्य में हार्ट अटैक या अन्य हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।
स्वस्थ जीवनशैली ही है सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन, पर्याप्त नींद और समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाकर हाई कोलेस्ट्रॉल और उससे जुड़ी कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अगर आपकी जांच रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ आता है, तो घबराने की बजाय किसी योग्य डॉक्टर से सलाह लें। सही समय पर जांच, उचित जीवनशैली और जरूरत पड़ने पर दवा के माध्यम से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

