रथ यात्रा के बाद ही रिलीज होगी ‘महाप्रभु जगन्नाथ’, सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई से प्रदर्शन की दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज पर लगी अंतरिम रोक को बरकरार रखते हुए कहा कि फिल्म का प्रदर्शन पुरी रथ यात्रा समाप्त होने के बाद 28 जुलाई से किया जा सकता है। अदालत ने धार्मिक भावनाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की बात कही।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने ओडिशा हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक को फिलहाल बरकरार रखा, लेकिन निर्देश दिया कि फिल्म को पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा समाप्त होने के बाद 28 जुलाई से देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में धार्मिक उत्सव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रथ यात्रा 27 जुलाई तक चलेगी, इसलिए फिल्म का प्रदर्शन उसके बाद शुरू किया जाए।
28 जुलाई से सिनेमाघरों में रिलीज होगी फिल्म
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि फिल्म को 28 जुलाई या उसके बाद रिलीज किया जा सकता है। इससे पहले हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त तक फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी थी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रथ यात्रा के धार्मिक आयोजन के दौरान किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो, इसलिए फिल्म की रिलीज कुछ दिनों के लिए स्थगित रखना उचित होगा।
केंद्र और ओडिशा सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान केंद्र और ओडिशा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग पुरी के गजपति महाराजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के प्रतिनिधियों के लिए आयोजित की गई थी।
उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म में कुछ बदलाव सुझाए गए थे, लेकिन निर्माता की ओर से उन सुझावों को अंतिम संस्करण में शामिल नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धार्मिक आयोजन के बाद हो रिलीज
सुनवाई के दौरान जब अदालत को बताया गया कि जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जुलाई तक चलेगी, तब न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान समाप्त होने के बाद फिल्म रिलीज की जा सकती है। अदालत ने इसे दोनों पक्षों के हितों के बीच “संतुलन” बनाने वाला निर्णय बताया।
निर्माता ने आर्थिक नुकसान का दिया हवाला
फिल्म निर्माता Ele Animations Pvt Ltd की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने दलील दी कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणपत्र मिल चुका है। ऐसे में उसके कंटेंट पर दोबारा आपत्ति उठाना उचित नहीं है।
उन्होंने अदालत को बताया कि फिल्म के निर्माण में करोड़ों रुपये का निवेश किया गया है और रिलीज में देरी से निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसी विषय पर आधारित एक टेलीविजन सीरीज पहले से ही यूट्यूब पर उपलब्ध है।
विवाद की वजह क्या है?
यह मामला ओडिशा हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के चित्रण में स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और पुरी मंदिर की पारंपरिक मान्यताओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया कि विशेष स्क्रीनिंग के दौरान उठाई गई आपत्तियों के बावजूद कुछ विवादित दृश्य फिल्म में बनाए रखे गए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम धार्मिक आस्था
निर्माता पक्ष का कहना है कि फिल्म एक काल्पनिक (फिक्शन) कृति है और इसमें स्पष्ट डिस्क्लेमर भी दिया गया है। उनका तर्क है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है।
वहीं अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस स्तर पर किसी पक्ष के अधिकारों की अनदेखी किए बिना संतुलित समाधान आवश्यक है। इसी वजह से फिल्म की रिलीज पर स्थायी रोक लगाने के बजाय केवल रथ यात्रा समाप्त होने तक ही इंतजार करने का निर्देश दिया गया।
अब फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ 28 जुलाई से देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज की जा सकेगी, जबकि मामले की विस्तृत सुनवाई हाई कोर्ट में आगे भी जारी रहेगी।

