MP Farmers Protest Ends : सरकार ने मूंग खरीदी सीमा 60% की, तीन दिनों से चल रहे आंदोलन को किसानों ने किया समाप्त
MP Farmers Protest Ends : सरकार ने मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी का दायरा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की घोषणा की।
MP Farmers Protest Ends : भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कई दिनों से चल रहा किसानों का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे किसानों ने सरकार के साथ लंबी बातचीत के बाद धरना खत्म करने की घोषणा की। इस आंदोलन के दौरान राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा और रोशनपुरा, न्यू मार्केट तथा मुख्यमंत्री निवास के आसपास का इलाका सुरक्षा व्यवस्था के कारण पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
कई स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी। किसानों ने लगातार बैरिकेड पार करते हुए मुख्यमंत्री निवास से करीब एक किलोमीटर पहले तक पहुंचकर सरकार पर बातचीत का दबाव बनाया। इसके बाद सरकार ने मंत्रियों की समिति बनाकर किसान प्रतिनिधियों से चर्चा की, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी।
मूंग खरीदी और ई-टोकन व्यवस्था पर सरकार ने लिए बड़े फैसले
सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सरकार ने मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी का दायरा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की घोषणा की। इसके साथ ही खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया।
सरकार ने कहा कि इस व्यवस्था की समीक्षा के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी। जब तक नई व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक खाद वितरण हाईब्रिड प्रणाली के तहत किया जाएगा।
स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त और खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त तक कर दी गई है, ताकि अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।
किसानों की मुख्य मांग अभी भी पूरी नहीं
किसान नेताओं ने सरकार के फैसलों का स्वागत किया, लेकिन स्पष्ट किया कि उनकी सबसे बड़ी मांग अभी पूरी नहीं हुई है। क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन और संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि वे मूंग की 100 प्रतिशत उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की मांग कर रहे थे, जबकि सरकार ने केवल 60 प्रतिशत खरीदी पर सहमति जताई है।
किसान नेताओं का कहना है कि यदि भविष्य में उनकी बाकी मांगों पर भी सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगे फिर आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। फिलहाल सरकार के आश्वासन को देखते हुए आंदोलन समाप्त किया गया है।
27 जुलाई से शुरू हुई किसान क्रांति यात्रा ने सरकार पर बनाया दबाव
किसानों की किसान क्रांति यात्रा 27 जुलाई को नर्मदापुरम से शुरू हुई थी। करीब दो हजार किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और आवश्यक सामान के साथ भोपाल की ओर पैदल रवाना हुए।
रास्ते में हरदा, इटारसी, भैरूंदा और मंडीदीप सहित कई स्थानों पर पुलिस ने बैरिकेड लगाकर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन आंदोलन जारी रहा।
किसानों ने कई जगह धरना दिया और आगे बढ़ते हुए राजधानी की सीमा तक पहुंच गए। 29 जुलाई को आंदोलन और तेज हो गया।
किसानों ने सड़क पर भोजन बनाया, प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने की कोशिश की। इसके बाद सरकार ने वार्ता का रास्ता चुना और समाधान की प्रक्रिया शुरू हुई।
पुलिस की सख्ती के बावजूद किसान पहुंचे रोशनपुरा तक
आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस ने इस बार व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। राजधानी तक पहुंचने वाले मार्गों पर 25 बैरिकेड लगाए गए। कई स्थानों पर स्कूल बसें और गिट्टी से भरे डंपर भी सड़क पर खड़े कर दिए गए, ताकि किसानों की आवाजाही रोकी जा सके।
नर्मदापुरम में कई किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद किसान 22 बैरिकेड पार करते हुए रोशनपुरा तक पहुंच गए।
जब किसान मुख्यमंत्री निवास से करीब एक किलोमीटर दूर पहुंच गए, तब सरकार ने चार मंत्रियों की समिति बनाकर वार्ता शुरू की और देर रात समझौते के बाद आंदोलन समाप्त हो गया।
केंद्र और राज्य सरकार के बीच मूंग खरीदी को लेकर बनी स्थिति
मूंग खरीदी को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त कोटा बढ़ाने का अनुरोध किया था। इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा कि पहले केंद्र से स्वीकृत खरीदी पूरी की जाए।
वर्ष 2025-26 के लिए मध्य प्रदेश को 4.55 लाख टन मूंग खरीदी की मंजूरी मिली है, जो देश में सबसे अधिक है। केंद्र का कहना है कि अतिरिक्त खरीदी पर निर्णय तभी लिया जाएगा, जब पहले से स्वीकृत मात्रा की खरीदी पूरी हो जाएगी। इस बीच राज्य सरकार ने अपने स्तर पर खरीदी का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है।
आंदोलन खत्म होने के बाद सामान्य हुई स्थिति
किसानों के आंदोलन समाप्त होने के बाद राजधानी भोपाल में स्थिति सामान्य होने लगी है। जिला प्रशासन ने गुरुवार के लिए स्कूलों में अवकाश का कोई नया आदेश जारी नहीं किया है। सभी शिक्षण संस्थान सामान्य रूप से संचालित होंगे। पुलिस ने भी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
किसानों के लौटने के साथ ही शहर की यातायात व्यवस्था भी धीरे-धीरे सामान्य हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार किसानों से किए गए वादों को कितनी जल्दी लागू करती है।

